Mahishasuramardini-16-17

कटितट-पीत-दुकूल-विचित्र-मयूख-तिरस्कृत-चन्द्ररुचे
प्रणत-सुरासुर-मौलिमणिस्फुर-दंशुल-सन्नख-चन्द्ररुचे ।
जित-कनकाचल-मौलिपदोर्जित-निर्भर-कुञ्जर-कुम्भकुचे
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते॥ १६ ॥

विजित-सहस्रकरैक-सहस्रकरैक-सहस्रकरैकनुते
कृतसुरतारक-सङ्गरतारक-सङ्गरतारक-सूनुसुते ।
सुरथ-समाधि समानसमाधि समाधिसमाधि सुजातरते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते॥ १७ ॥

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